ज्वार की खेती कैसे करें 2026: बुवाई से कटाई तक पूरी जानकारी

 ज्वार की खेती कैसे करें: बुवाई से कटाई तक पूरी जानकारी 

ज्वार की खेती करते हुए भारतीय किसान


ज्वार की खेती भारत के कई राज्यों में पारंपरिक रूप से की जाती है, और आज भी यह एक भरोसेमंद फसल पानी जाती है।

कम पानी में तैयार होने होने वाली यहफसल अनाज के साथ-साथ पशु चारे के रूप में भी उपयोगी है। बदलते मौसम और बढ़तीलगत के दौर में ज्वार की तिथि किसानों के लिए कम जोखिम और स्थिर आय देने वाला विकल्प बन रही है।

अगर आप ज्वार की खेती सही तरीके से करते हैं, तो कम लागत में अच्छी पैदावार और बेहतर मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं। इस खेती-बाड़ी जानकारी में हम ज्वार की खेती से जुडी पूरी जानकारी आसान भाषा में बताएंगे।

👉 कम पानी में उगने वाली फसलों की पूरी जानकारी

ज्वार की खेती क्यों लाभदायक है?

  • कम पानी में अच्छी फसल 
  • सूखा भी सहन करने की क्षमता 
  • अनाज और चारे दोनों के लिए उपयुक्त 
  • बाजार में स्थिर मांग 
  • पशुपालक किसानों के विशेष लाभदायक 

इन्हीं कारणों से ज्वार की खेती छोटे और मध्यम किसानों के लिए बहुत फायदेमंद मानी जाती है।

ज्वार के लिए उपयुक्त जलवायु और मिट्टी 

ज्वार की खेती गर्म और शुष्क जलवायु में अच्छी होती है।

  • तापमान: 25°c से 35°c
  • हल्की से मध्यम वर्षा पर्याप्त 
  • जलभराव से बचाव जरूरी 

मिट्टी:

  • दोमट मिट्टी 
  • बलुई दोमट मिट्टी 
  • काली मिट्टी 

मिट्टी का pH मान 6.0 से 7.5 उपयुक्त माना जाता है।


👉 मिट्टी की जांच कैसे करें? Soil Health Card से फसल उत्पादन बढ़ाएं।

ज्वार की उन्नत किस्में 

कुछ लोकप्रिय किस्में:

  • CSV-15
  • CSV-20
  • CSH-16
  • CSH-25
  • हाइब्रिड ज्वार किस्में

अपने क्षेत्र के अनुसार कृषि विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र से किस्म की जानकारी लेना बेहतर रहता है।

👉 उत्तर प्रदेश बीज विकास निगम

खेत की तैयारी 

ज्वार की खेती से पहले खेत की सही तैयारी बहुत जरूरी है।

  • 2–3 गहरी जुताई करें 
  • पाटा लगाकर मिट्टी भुरभुरी बनाएं 
  • खरपतवार पूरी तरह निकालें 

अच्छी खेत तैयारी से अंकुरण अच्छा होता है।

बुवाई का सही समय और तरीका 

ज्वार की बुवाई करते किसान


खरीफ ज्वार:

  • जून से जुलाई 

रबी ज्वार:

  • अक्टूबर से नवंबर 

बीज मात्रा:

  • 8–10 किलोगाम प्रति हेक्टेयर 

बुवाई की विधि: 

  • कतारों में बुवाई करें 
  • कतार दूरी: 45 सेमी
  • पौधे की दूरी: 15 सेमी

बीज उपचार करने से रोगों से बचाव होता है।

👉 बाजरा की खेती: कम लागत में अधिक उत्पादन कैसे पाएं?

खाद और उर्वरक प्रबंधन 

संतुलित पोषण से ज्वार की खेती में पैदावार बढ़ती है।

प्रति हेक्टेयर:

  • गोबर खाद: 8-10 टन 
  • नाइट्रोजन: 80 किलोग्राम 
  • फास्फोरस: 40 किलोग्राम 
  • पोटाश: 40 किलोग्राम 

आधी नाइट्रोजन बुवाई के समय और आधी 30 दिन बाद डालें।

सिंचाई प्रबंधन 

ज्वार की खेती अधिक पानी नहीं मांगती।

  • पहली सिंचाई बुवाई के 20-25 दिन बाद 
  • दूसरी सिंचाई बालियां निकलते समय 
  • जलभराव से बचें 

कम पानी में भी ज्वार अच्छी फसल देता है।

👉 स्मार्ट सिंचाई तकनीक: जल बचत से बड़े उत्पादन पूरी जानकारी

खरपतवार नियंत्रण 

खरपतवार ज्वार की पैदावार कम कर देते हैं।

  • 20-25 दिन बाद निराई-गुड़ाई 
  • जरूरत हो तो शाकनाशी दवा का प्रयोग करें 

👍🏻 खेत साफ रखने से फसल स्वस्थ रहती है।

ज्वार की खेती में रोग और कीट नियंत्रण 

स्वस्थ ज्वार की फसल


प्रमुख रोग 

  • डाउनी मिल्ड्यू 
  • पत्ती धब्बा रोग
  • एन्थ्रेक्नोज

प्रमुख कीट 

  • तना छेदक 
  • माहू (एफिड)
  • शूट फ्लाई 

नियंत्रण:

  • बीज उपचार करें 
  • नीम आधारित दवाओं का उपयोग 
  • आवश्यकता पड़ने पर कृषि विशेषज्ञ की सलाह लें।

कटाई और पैदावार 

ज्वार की कटाई करते किसान


  • फसल 100-110 दिन में तैयार 
  • दाने सख्त होने पर कटाई करें

औसत पैदावार:

  • 15-25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर 

अच्छी देखभाल से इससे अधिक भी मिल सकती है।

ज्वार की खेती में मुनाफा 

लागत कम होने के कारण ज्वार की खेती लाभदायक है।

  • बीज, खाद, मजदूरी की लागत कम 
  • अनाज + चारा दोनों से आय
  • बाजार में मांग बनी रहती है।

किसान की सच्ची कहानी 

मध्य प्रदेश में किसान रमेश जी भाई पहले केवल सोयाबीन उगाते थे। पानी की कमी के कारण नुकसान होता था। उन्होंने ज्वार की खेती शुरू की।

परिणाम:

  • कम पानी में अच्छी फसल 
  • पशुओं के लिए चारा मिला
  • आय में करीब 30% बढ़ोत्तरी 

रमेश जी कहते हैं –

"ज्वार की खेती जब से करता हूं तो लगता है कि खेती से कुछ मिलता है।"

FAQs – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल 

Q. ज्वार की खेती कब करनी चाहिए?

👉 जून-जुलाई या अक्टूबर-नवंबर में।

Q. ज्वार की खेती में कितना पानी चाहिए?

👉 बहुत कम, केवल 2–3 सिंचाई।

Q. क्या ज्वार की खेती लाभदायक है?

👉 हां, कम लागत और अच्छा मुनाफा देती है।

निष्कर्ष 

ज्वार की खेती किसानों के लिए एक सुरक्षित कम लागत और भरोसेमंद विकल्प है। सही समय पर बुवाई संतुलित खाद सीमित सिंचाई और समय पर देखभाल से ज्वार की खेती में अच्छा उत्पादन लिया जा सकता है। अगर आप कम पानी में बेहतर फसल चाहते हैं, तो ज्वार खेती जरूर अपनाएं।

सवाल सुझाव और फोटो शेयर जरूर करें –

jankarikhetibadi@gmail.com

आप हमें सोशल मीडिया पर भी मैसेज कर सकते हैं।

अगर यह खेतीबाड़ी जानकारी किसान भाइयों को उपयोगी लगे तो अपने किसान दोस्तों को जरूर शेयर करें। धन्यवाद 🙏🏻 

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

💧 ड्रिप सिंचाई 2025 : कम पानी, ज्यादा मुनाफा

भारत में आलू की प्रमुख किस्में 2025 | कुफरी आलू बीज, उत्पादन और सही चयन गाइड

“जलवायु अनुकूल खेती 2026 – कम लागत, सुरक्षित उत्पादन और नई तकनीकें”