ज्वार की खेती कैसे करें 2026: बुवाई से कटाई तक पूरी जानकारी

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 ज्वार की खेती कैसे करें: बुवाई से कटाई तक पूरी जानकारी  ज्वार की खेती भारत के कई राज्यों में पारंपरिक रूप से की जाती है, और आज भी यह एक भरोसेमंद फसल पानी जाती है। कम पानी में तैयार होने होने वाली यहफसल अनाज के साथ-साथ पशु चारे के रूप में भी उपयोगी है। बदलते मौसम और बढ़तीलगत के दौर में ज्वार की तिथि किसानों के लिए कम जोखिम और स्थिर आय देने वाला विकल्प बन रही है। अगर आप ज्वार की खेती सही तरीके से करते हैं, तो कम लागत में अच्छी पैदावार और बेहतर मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं। इस खेती-बाड़ी जानकारी में हम ज्वार की खेती से जुडी पूरी जानकारी आसान भाषा में बताएंगे। 👉 कम पानी में उगने वाली फसलों की पूरी जानकारी ज्वार की खेती क्यों लाभदायक है? कम पानी में अच्छी फसल  सूखा भी सहन करने की क्षमता  अनाज और चारे दोनों के लिए उपयुक्त  बाजार में स्थिर मांग  पशुपालक किसानों के विशेष लाभदायक  इन्हीं कारणों से ज्वार की खेती छोटे और मध्यम किसानों के लिए बहुत फायदेमंद मानी जाती है। ज्वार के लिए उपयुक्त जलवायु और मिट्टी  ज्वार की खेती गर्म और शुष्क जलवायु में अच्छी होती ह...

"2025 में सरसों की खेती से अधिक पैदावार: बुवाई, खाद, सिंचाई और रोग नियंत्रण"

🌾सरसों की खेती 2025: आधुनिक तकनीक और बुवाई से कटाई तक की पूरी जानकारी


सरसों की खेती की पूरी जानकारी

Khetibadi Jankari


परिचय

सरसों भारत की प्रमुख तिलहन फसलों में से एक है। इसकी खेती अक्टूबर-नवंबर में की जाती है और इसे किसानों के लिए नकदी फसल माना जाता है। 2025 में, उन्नत किस्मों, संतुलित उर्वरक, सिंचाई तकनीक और रोग प्रबंधन से किसान कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।

उपयुक्त मिट्टी और जलवायु


सरसों की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी और जलवायु

सरसों की खेती हल्की से मध्यम और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी में सफल होती है।

मिट्टी का पीएच 6-7 के बीच होना सबसे अच्छा होता है।

सरसों की फसल के लिए ठंडा और शुष्क मौसम आदर्श माना जाता है।

सितंबर-अक्टूबर में खेत तैयार करें।

👉 मिट्टी की जांच कैसे करें? घरेलू और वैज्ञानिक उपाय

बीज और उनकी तैयारी

सरसों की खेती के लिए उपयुक्त बीज चुनाव



उन्नत किस्में (2025 के लिए):

पूसा बोल्ड, वरुणा, बायो-राज, क्रांति।

बीज सरकारी बीज केंद्रों, कृषि विज्ञान केंद्रों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर आसानी से उपलब्ध हैं।

बीज उपचार:

बुवाई से पहले बीजों को थायरम या कैप्टान (2-3 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज) से उपचारित करना आवश्यक है ताकि रोग न फैलें।

बुवाई तकनीक

सरसों बुवाई तकनीक

समय:

सितंबर के अंत से अक्टूबर तक।

विधि:

हाथ से या बीज बोने वाली मशीन से।

पंक्ति दूरी:

30 सेमी और पौधों की दूरी 10-15 सेमी।

मशीन से बुवाई करने से बीज की बचत होती है और पौधे समान रूप से बढ़ते हैं।

👉 मिट्टी की सेहत और सस्टेनेबल खेती

पोषण प्रबंधन

यूरिया:

25-30 किलोग्राम प्रति एकड़ (आधा बुवाई के समय और शेष बाद में)।

सुपरफॉस्फेट:

40-50 किलोग्राम प्रति एकड़।

पोटाश:

20-25 किलोग्राम प्रति एकड़।

सल्फर:

5-7 किलोग्राम प्रति एकड़ (पत्ती पीली होने की बीमारी से बचाव और उपज बढ़ाने के लिए आवश्यक)।

संतुलित उर्वरक देने से फसल की उपज और गुणवत्ता दोनों बढ़ती है।

सिंचाई

सरसों की फसल में सिंचाई व्यवस्था

सामान्यतः

सरसों को 3-4 सिंचाई की आवश्यकता होती है।

लेकिन जिन क्षेत्रों में मिट्टी लंबे समय तक नम रहती है (भारी या मध्यम मिट्टी और अच्छी वर्षा वाले क्षेत्र), वहाँ फसल केवल 1-2 सिंचाई से ही तैयार हो जाती है।

किसानों को अपने खेत की मिट्टी और नमी को देखकर यह तय करना चाहिए कि उन्हें कितनी बार सिंचाई करनी है।

ध्यान रखें, अत्यधिक जलभराव सरसों की जड़ों के लिए हानिकारक है, इसलिए जल निकासी उचित होनी चाहिए।

कीट और रोग प्रबंधन 

सरसों की फसल में रोग और कीट नियंत्रण

कीट:

पत्ती खाने वाले कीट, हरी मक्खी।

रोग:

पत्ती पीला रोग, अल्टरनेरिया ब्लाइट।

उपचार:

जैविक:

नीम के तेल का छिड़काव।

रासायनिक:

कार्बेन्डाजिम या मैन्कोजेब (पैकेज पर लिखी मात्रा के अनुसार)।

संक्रमित पौधों को खेत से हटा दें।

👉 सरसों की खेती में कीट और रोग नियंत्रण की पूरी जानकारी के लिए पढ़ें

कटाई और कटाई के बाद देखभाल

सरसों की फसल की कटाई और देखभाल


सरसों की फसल 3-4 महीने में तैयार हो जाती है।

कटाई से 1-2 हफ़्ते पहले पौधों की ऊपरी शाखाओं को हल्के से काट लें ताकि बीज मज़बूत हो सकें।

कटाई के बाद, फसल को धूप में अच्छी तरह सुखाएँ और फिर बीजों को संग्रहित करें।

👉 भारतीय कृषि अनुसंधान (ICAR)

आधुनिक तकनीकें

खेती की आधुनिक तकनीक है


ड्रोन और सेंसर से खेतों की निगरानी।

आधुनिक बीज बोने वाली मशीनें जो समय और श्रम बचाती हैं।

स्मार्ट उर्वरक उपयोग (एनपीके पैकेज)।

नई तकनीकें किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने में मदद कर रही हैं।

👉 आधुनिक सिंचाई तकनीक

FAQs 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q1. सरसों की बुवाई का सबसे अच्छा समय कौन सा है? 
सरसों की बुवाई के लिए सितंबर के अंतिम सप्ताह से अक्टूबर के मध्य सप्ताह तक का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है। 

Q2. सरसों में सल्फर क्यों जरूरी होता है? 
सल्फर सरसों में तेल की मात्रा बढ़ाने और पत्तियों के पीले पान की समस्या से बचने के लिए आवश्यक पोषक तत्व है।

Q3. सरसों की खेती में कितनी सिंचाई की जरूरत होती है?
मिट्टी और नमी के अनुसार 1 से 2 सिंचाई पर्याप्त होती है। अधिक अपनी फसल को नुकसान पहुंचा सकता है।

Q4. सरसों में रोग और किट से बचाव कैसे करें? 
नीम तेल जैसे जैविक उपाय अपनाएं और जरूरत पड़ने पर अनुशंसित मात्रा में फफूंद नाशक या कीटनाशक का प्रयोग करें। 

Q5. सरसों की फसल कितने समय में तैयार हो जाती है? 
सरसों की फसल सामान्यतः 90 से 120 दिन में कटाई के लिए तैयार हो जाती है ।

निष्कर्ष 

किसान सरसों की खेती में सही किस्मों, समय पर बुवाई, संतुलित खाद प्रबंधन और उचित सिंचाई अपनाते हैं तो सरसों की खेती अत्यंत लाभकारी फसल सिद्ध हो सकती है। आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक तरीकों के साथ की गई खेती से उत्पादन बढ़ता है लागत घटती है और फसल की गुणवत्ता भी बेहतर होती है। सरसों की खेती किसानों के लिए कम समय में अधिक मुनाफा देने वाली एक भरोसेमंदफसल है।

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