ज्वार की खेती कैसे करें 2026: बुवाई से कटाई तक पूरी जानकारी
सरसों की खेती हल्की से मध्यम और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी में सफल होती है।
मिट्टी का पीएच 6-7 के बीच होना सबसे अच्छा होता है।
सरसों की फसल के लिए ठंडा और शुष्क मौसम आदर्श माना जाता है।
सितंबर-अक्टूबर में खेत तैयार करें।
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पूसा बोल्ड, वरुणा, बायो-राज, क्रांति।
बीज सरकारी बीज केंद्रों, कृषि विज्ञान केंद्रों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर आसानी से उपलब्ध हैं।
बुवाई से पहले बीजों को थायरम या कैप्टान (2-3 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज) से उपचारित करना आवश्यक है ताकि रोग न फैलें।
सितंबर के अंत से अक्टूबर तक।
हाथ से या बीज बोने वाली मशीन से।
30 सेमी और पौधों की दूरी 10-15 सेमी।
मशीन से बुवाई करने से बीज की बचत होती है और पौधे समान रूप से बढ़ते हैं।
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25-30 किलोग्राम प्रति एकड़ (आधा बुवाई के समय और शेष बाद में)।
40-50 किलोग्राम प्रति एकड़।
20-25 किलोग्राम प्रति एकड़।
5-7 किलोग्राम प्रति एकड़ (पत्ती पीली होने की बीमारी से बचाव और उपज बढ़ाने के लिए आवश्यक)।
संतुलित उर्वरक देने से फसल की उपज और गुणवत्ता दोनों बढ़ती है।
सरसों को 3-4 सिंचाई की आवश्यकता होती है।
लेकिन जिन क्षेत्रों में मिट्टी लंबे समय तक नम रहती है (भारी या मध्यम मिट्टी और अच्छी वर्षा वाले क्षेत्र), वहाँ फसल केवल 1-2 सिंचाई से ही तैयार हो जाती है।
किसानों को अपने खेत की मिट्टी और नमी को देखकर यह तय करना चाहिए कि उन्हें कितनी बार सिंचाई करनी है।
ध्यान रखें, अत्यधिक जलभराव सरसों की जड़ों के लिए हानिकारक है, इसलिए जल निकासी उचित होनी चाहिए।
पत्ती खाने वाले कीट, हरी मक्खी।
पत्ती पीला रोग, अल्टरनेरिया ब्लाइट।
नीम के तेल का छिड़काव।
कार्बेन्डाजिम या मैन्कोजेब (पैकेज पर लिखी मात्रा के अनुसार)।
संक्रमित पौधों को खेत से हटा दें।
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सरसों की फसल 3-4 महीने में तैयार हो जाती है।
कटाई से 1-2 हफ़्ते पहले पौधों की ऊपरी शाखाओं को हल्के से काट लें ताकि बीज मज़बूत हो सकें।
कटाई के बाद, फसल को धूप में अच्छी तरह सुखाएँ और फिर बीजों को संग्रहित करें।
ड्रोन और सेंसर से खेतों की निगरानी।
आधुनिक बीज बोने वाली मशीनें जो समय और श्रम बचाती हैं।
स्मार्ट उर्वरक उपयोग (एनपीके पैकेज)।
नई तकनीकें किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने में मदद कर रही हैं।