बाजरा की खेती: कम लागत में अधिक पैदावार और मुनाफे की पूरी जानकारी
🌾 बाजरा की खेती: बुवाई से कटाई तक पूरी जानकारी
परिचय
बाजरा की खेती भारत के सूखा प्रभावित और कम वर्षा वाले क्षेत्रों में किसानों के लिए वरदान मानी जाती है। यह फसल कम पानी में अच्छी पैदावार देती है, लागत कम होती है और बाजार में उसकी मांग लगातार बढ़ रही है आज के समय में जब खेती की लागत बढ़ रही है तब बाजरा की खेती किसानों के लिए सुरक्षित और लाभकारी विकल्प बनती जा रही है।
अगर आप भी बाजरा की खेती करके अच्छी उपज और मुनाफा चाहते हैं तो यह खेती-बाड़ी जानकारी आपके लिए पूरी मार्गदर्शिका है।
बाजरा की खेती क्यों फायदेमंद है?
- कम पानी में उगने वाली फसल
- सूखा और गर्मी सहन करने की क्षमता
- लागत कम मुनाफा ज्यादा
- पशु चारे और मानव भोजन दोनों के लिए उपयोगी
- मोटे अनाज (Millets) की बढ़ती मांग
इन्हीं कारणों से आज बाजरा की खेती छोटे और बड़े किसानों के लिए अच्छा विकल्प बन चुकी है।
👉 कम पानी में उगने वाली फसलों की पूरी जानकारी
बाजरा के लिए उपयुक्त जलवायु और मिट्टी
जलवायु
- गर्म और शुष्क जलवायु सबसे उपयुक्त
- तापमान: 25°c से 35°c
- बहुत ज्यादा नमी से नुकसान हो सकता है
मिट्टी
- हल्की दोमट या बलुई दोमट मिट्टी
- जल निकास अच्छा होना चाहिए
- पीएच मान 6.5 से 7.5
खेत की तैयारी कैसे करें?
- पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल (प्लाउ) से
- 2-3 बार देसी हल या कल्टीवेटर से जुताई
- आखिरी जुताई के समय खेत समतल करें
- 8-10 टन सड़ी गोबर खाद प्रति हेक्टेयर मिलाएं
⚠️ अच्छी खेत तैयारी से बाजरा की खेती में जड़ें मजबूत बनती हैं और पैदावार बढ़ती है।
बाजार की बुवाई का सही समय
- खरीफ फसल के रूप में: जून से जुलाई
- जहां सिंचाई सुविधा हो: जुलाई के अंत तक
⚠️ देरी से बुवाई करने पर उपज कम हो सकती है।
बीज की मात्रा और बीज उपचार
बीज की मात्रा
- 4-5 किलो प्रति हेक्टेयर
बीज उपचार
- कार्बनडाइजम या थायरम 2 ग्राम प्रति किलो बीज
- जैविक विकल्प: ट्राइकोडर्मा 5 ग्राम प्रति किलो बीज
⚠️ बीज उपचार से रोगों से सुरक्षा मिलती है।
उन्नत किस्में
- HHB 67 Improved
- ICTP 8203
- Pusa 322
- RHB 173
⚠️ अपने क्षेत्र के अनुसार कृषि विभाग से किस्म की जानकारी लें।
👉 भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ICAR
बुवाई की विधि
- कतारों में बुवाई बेहतर
- कतार से कतार: दूरी 45 सेमी
- पौधे से पौधे की दूरी: 10-12सेमी
- बीज गहराई: 3-4 सेमी
खाद और उर्वरक प्रबंधन
सामान्य सिफारिश (प्रति हेक्टेयर):
- नाइट्रोजन: 60 किलो
- फास्फोरस: 30 किलो
- पोटाश: 20 किलो
देने का तरीका
- आधी नाइट्रोजन + पूरी फास्फोरस + पोटाश बुवाई के समय
- आधी नाइट्रोजन 25-30 दिन बाद
जैविक विकल्प:
- वर्मी कम्पोस्ट
- जीवामृत
- गोबर खाद
सिंचाई प्रबंधन
- आमतौर पर बारिश आधारित फसल
- जरूरत पड़ने पर एक दो सिंचाई पर्याप्त
- ज्यादा पानी से नुकसान
खरपतवार (घास) नियंत्रण
- 20-25 दिन बाद निराई-गुड़ाई
- आवश्यकता हो तो एट्राजिन 1 किलो प्रति हेक्टेयर बुवाई के तुरन्त बाद
बाजरा की प्रमुख कीट समस्याएं
तना छेदक
- पौधे का बीज का हिस्सा सूख जाता है
शूट फ्लाई
- पौधा पीला होकर मर जाता है
नियंत्रण
- नीम तेल 3 मिली प्रति लीटर पानी
- आवश्यकता होने पर क्लोरपायरीफोस 1 लीटर प्रति हेक्टेयर
बाजरा की प्रमुख बीमारियां
डाउनी मिल्ड्यू हरित रोग
ब्लास्ट रोग
नियंत्रण
- रोगरोधी किस्में अपनाएं
- कार्बेन्डाजिम 1 ग्राम प्रति लीटर पानी
फसल की निगरानी
- हफ्ते में 1 बार खेत का निरीक्षण
- रोग और कीट के शुरुआती लक्षण देखें
- समय पर उपचार करें
कटाई का सही समय
- 80-90 दिन में फसल पक जाती है
- बालियां सूखने लगें
- दाने कठोर हो जाएं
उपज
- 18-25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर
- अच्छी देखभाल से अधिक भी संभव
बाजरा की खेती में लागत और मुनाफा
अनुमानित लागत
- 10,000 से 14,000 रुपए/हेक्टेयर
संभावित आय
- 25,000 से 40,000 रुपए/हेक्टेयर
किसान की सच्ची कहानी
राजस्थान के किसान मोहनलाल पहले केवल चना उगाते थे। पानी की कमी से नुकसान होता था। उन्होंने बाजार की खेती अपनाई। कम सिंचाई से अच्छी फसल हुई और आज वह हर साल बाजरा से स्थिर आय कमा रहे हैं।
उनका कहना है:
"बाजरा ने मेरी खेती बचा ली।"
बाजरा की खेती में सफल होने के टिप्स
- सही समय पर बुवाई
- संतुलित खाद
- कम लेकिन समय पर सिंचाई
- नियमित निगरानी
FAQs
Q1. बाजरा कितने दिन में तैयार होता है?
👉 80-90 दिन में
Q2. क्या बाजरा कम पानी में उगाया जा सकता है?
👉 हां, यह सूखा सहनशील फसल है।
Q3. बाजरा की खेती किस मिट्टी में अच्छी होती है?
👉 बलुई दोमट और दोमट मिट्टी में।
Q4. क्या बाजरा लाभकारी फसल है?
हां बिल्कुल, कम लागत में अच्छा मुनाफा देती है।
निष्कर्ष
बाजार की खेती आज के समय में किसानों के लिए सुरक्षित सस्ती और लाभकारी खेती का बेहतरीन विकल्प है सही तकनीक समय पर बुवाई और संतुलित देखभाल से किसान बाजार से अच्छी पैदावार और स्थिर आय प्राप्त कर सकते हैं।
अगर आप कम जोखिम वाली खेती चाहते हैं, तो बाजरा की खेती जरूर अपनाएं।
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