ज्वार की खेती कैसे करें 2026: बुवाई से कटाई तक पूरी जानकारी

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 ज्वार की खेती कैसे करें: बुवाई से कटाई तक पूरी जानकारी  ज्वार की खेती भारत के कई राज्यों में पारंपरिक रूप से की जाती है, और आज भी यह एक भरोसेमंद फसल पानी जाती है। कम पानी में तैयार होने होने वाली यहफसल अनाज के साथ-साथ पशु चारे के रूप में भी उपयोगी है। बदलते मौसम और बढ़तीलगत के दौर में ज्वार की तिथि किसानों के लिए कम जोखिम और स्थिर आय देने वाला विकल्प बन रही है। अगर आप ज्वार की खेती सही तरीके से करते हैं, तो कम लागत में अच्छी पैदावार और बेहतर मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं। इस खेती-बाड़ी जानकारी में हम ज्वार की खेती से जुडी पूरी जानकारी आसान भाषा में बताएंगे। 👉 कम पानी में उगने वाली फसलों की पूरी जानकारी ज्वार की खेती क्यों लाभदायक है? कम पानी में अच्छी फसल  सूखा भी सहन करने की क्षमता  अनाज और चारे दोनों के लिए उपयुक्त  बाजार में स्थिर मांग  पशुपालक किसानों के विशेष लाभदायक  इन्हीं कारणों से ज्वार की खेती छोटे और मध्यम किसानों के लिए बहुत फायदेमंद मानी जाती है। ज्वार के लिए उपयुक्त जलवायु और मिट्टी  ज्वार की खेती गर्म और शुष्क जलवायु में अच्छी होती ह...

आलू की खेती में 20–25 दिन बाद क्या करें? जैविक देखभाल और सही पोषण

 आलू की खेती: 20–25 दिन बाद जैविक देखभाल और पोषण प्रबंधन

20-25 दिन बाद आलू की खेती की देखभाल


Khetibadi Jankari | किसानों के लिए प्रैक्टिकल खेतीबाड़ी जानकारी 

👉 यह भी पढ़ें: आलू की खेती: जैविक और रासायनिक पूरी जानकारी 

✳️ परिचय 

आलू की खेती में बुवाई 20-25 दिन बाद का समय सबसे निर्णायक चरण होता है। इसी समय पौधों की जड़े मजबूत होती हैं, कंद बनने की प्रक्रिया शुरू होती है और फसल का भविष्य तय होता है।

अगर इस स्टेज पर:

  • सही मिट्टी चढ़ाना 
  • संतुलित सिंचाई 
  • जैविक पोषण 
  • समय पर कीट रोग नियंत्रण

किया जाए, तो उपज 20-30% तक बढ़ सकती है और आलू का साइज व क्वालिटी दोनों बेहतर होती हैं।

1️⃣ मिट्टी चढ़ाना (Earthing Up in Potato – 20–25 Days)

आलू की खेती में 20–25 दिन बाद मिट्टी चढ़ाना


⏱️ सही समय

  • बुवाई के 20-25 दिन बाद

🌱 क्यों जरूरी है?

  • कंदों को धूप से हरा (Greening) होने से बचाता है
  • जड़ों का फैलाव अच्छा होता 
  • पौधे गिरने से बचते हैं
  • कंदों का आकार और संख्या बढ़ती है

✅ सही तरीका 

  • हल्की गुड़ाई के साथ बेड के दोनों ओर मिट्टी चढ़ाएं
  • मिट्टी भुरभुरी और सुखी न हो 
  • मिट्टी चढ़ाते समय पौधे को नुकसान न पहुंचे 

✔️ ध्यान रखें : मिट्टी चढ़ाने के बाद हल्की सिंचाई जरूर करें।

2️⃣ सिंचाई प्रबंधन  (Irrigation Management After 20 Days)

⏱️ समय 

  • मिट्टी चढ़ाने के तुरंत बाद

💧 सिंचाई क्यों जरूरी?

इस स्टेज पर नमी की कमी से कंद कम बनते हैं 
अधिक पानी से कंद सड़न और फफूंद रोग बढ़ते हैं 

✅ सही सिंचाई तरीका 

  • ड्रिप सिंचाई सबसे उत्तम
  • या हल्की फराओ सिंचाई 
  • जल भराव से पूरी तरह बचें 

🌿 जैविक उपाय 

  • मल्चिंग (पुआल / सूखी घास) करें 

3️⃣ जैविक कीट एवं रोग प्रबंधन

(Organic Pest & Disease Control in Potato)

⚠️ इस समय खतरा क्यों बढ़ता है? 

20-25 दिन बाद:
  • तना और पत्तियां तेजी से बढ़ती हैं 
  • चूसक कीट और फफूंद रोग सक्रिय होते हैं

🌱 जैविक उपचार (पहली प्राथमिकता)

✅ नीम तेल स्प्रे 

  • मात्र: 3-5 ml/लीटर पानी 
  • लाभ:

  1. एफिड, थ्रिप्स, सफेद मक्खी नियंत्रण
  2. पूरी तरह सुरक्षित 

✅  टाइकॉडर्मा 

  • मिट्टी या पानी में प्रयोग 
  • जड़ सड़न और फफूंद रोग से सुरक्षा 

⚠️ रासायनिक विकल्प केवल जरूरत पर

  • मैंकोजेब 2–2.5 ग्राम/लीटर 
  • लगातार स्प्रे से बचें 
  • जैविक खेती में अंतिम विकल्प के रूप में प्रयोग करें

4️⃣ जैविक पोषण प्रबंधन (Organic Nutrient Management)

आलू की फसल में जैविक खाद और पोषण प्रबंधन


⏱️ समय 

  • 20–25 दिन बाद, मिट्टी चढ़ाने के साथ 

🌿 जैविक खाद (Recommended)

✅ वर्मी कम्पोस्ट 

  •  मात्र: 1 टन/एकड़
  • लाभ:
  1. मिट्टी की संरचना सुधार 
  2. कंदों का विकास तेज 

✅ गोबर की खाद 

  • मात्रा: 2 टन/एकड़
  • धीरे-धीरे पोषक तत्व उपलब्ध कराती है 

✅ नीम की खली

  • मात्र: 50–100 kg/एकड़ 
  • कीट नियंत्रण + पोषण दोनों 

⚠️ रासायनिक पोषण (अगर बहुत जरूरत हो)

  • यूरिया: बहुत सीमित मात्रा में 
  • पोटाश: कंद विकास के लिए उपयोगी 
✔️ हमेशा मिट्टी जांच के आधार पर ही प्रयोग करें

5️⃣ पौधों का नियमित निरीक्षण 

(Crop Monitoring -Every 4-5 Days)

👀 क्या देखें?

  • पत्तियों का रंग 
  • तने की मजबूती 
  • कीट या रोग के लक्षण
  • पौधों की समान वृद्धि 

✅ जरूरी कदम 

  • संक्रमित पौधे तुरंत अलग करें 
  • जैविक स्प्रे समय पर करें
  • खेत में नमी और खरपतवार पर नियंत्रण रखें 

⚜️ 20-25 दिन का Golden Rule

✔️ मिट्टी चढ़ाना अनिवार्य
✔️ हल्की लेकिन समय पर सिंचाई
✔️ जैविक खाद + नीम आधारित उपचार
✔️ 4 – 5 दिन में खेत का निरीक्षण 
✔️ जलभराव और अंधाधुंध दवा से बचाव 

🟢 निष्कर्ष 

अगर आलू की खेती में 20–25 दिन के बाद सही जैविक देखभाल की जाए,
तो:
  • कंद बड़े बनते हैं 
  • रोग कम लगते हैं
  • उत्पादन और मुनाफा दोनों बढ़ते हैं
👉यही स्टेज अच्छी फसल और औसत फसल का अंतर तय करता है।

❓FAQs – आलू की खेती (20–25 दिन बाद देखभाल)

Q1. आलू में 20–25 दिन बाद सबसे जरूरी काम क्या है?
👉 मिट्टी चढ़ाना (Earthing up) और उसके साथ हल्की सिंचाई सबसे जरूरी काम है। इससे कंद हरे नहीं होते और उपज बढ़ती है।

Q2. क्या 20–25 दिन बाद आलू में खाद डालना जरूरी है?
👉 हाँ। इस समय वर्मी कम्पोस्ट, गोबर खाद और नीम की खली देना बहुत फायदेमंद होता है। यही समय कंद बनने की शुरुआत का होता है।

Q3. आलू में इस समय कौन-से कीट और रोग का खतरा रहता है?
👉
  • एफिड (चूसक कीट)
  • पत्ती झुलसा
  • कंद सड़न (Fungal disease)
👉 नीम तेल + टाइकॉडर्मा से ज्यादातर समस्या कंट्रोल हो जाती है।

Q4. क्या 20–25 दिन बाद रासायनिक दवा देना जरूरी है?
👉 नहीं। पहले जैविक उपाय अपनाएं।
केवल ज्यादा रोग होने पर ही मैंकोजेब, मैट्रिब्यूजन जैसी दवा सीमित मात्रा में दें।

Q5. इस समय कितनी सिंचाई करनी चाहिए?
👉
  • मिट्टी चढ़ाने के बाद एक हल्की सिंचाई
  • आगे हर 7–10 दिन में (मिट्टी की नमी देखकर)
❌ जलभराव बिल्कुल न होने दें।

Q6. क्या मल्चिंग करने से फायदा होता है?
👉 हाँ। मल्चिंग से:
  • नमी बनी रहती है
  • खरपतवार कम होते हैं
  • मिट्टी ठंडी रहती है
  • कंद का साइज अच्छा होता है
Q7. 20–25 दिन की देखभाल से कितनी उपज बढ़ सकती है?
👉 सही देखभाल करने पर 20–30% तक उपज में बढ़ोतरी देखी गई है।

Q8. जैविक आलू की खेती में सबसे बड़ी गलती क्या होती है?
👉
  • समय पर मिट्टी न चढ़ाना
  • ज्यादा पानी देना
  • बिना जरूरत दवा छिड़कना
  • खेत का निरीक्षण न करना

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