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बाजरा की खेती: कम लागत में अधिक पैदावार और मुनाफे की पूरी जानकारी

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 🌾 बाजरा की खेती: बुवाई से कटाई तक पूरी जानकारी  को परिचय  बाजरा की खेती भारत के सूखा प्रभावित और कम वर्षा वाले क्षेत्रों में किसानों के लिए वरदान मानी जाती है। यह फसल कम पानी में अच्छी पैदावार देती है, लागत कम होती है और बाजार में उसकी मांग लगातार बढ़ रही है आज के समय में जब खेती की लागत बढ़ रही है तब बाजरा की खेती किसानों के लिए सुरक्षित और लाभकारी विकल्प बनती जा रही है।  अगर आप भी बाजरा की खेती करके अच्छी उपज और मुनाफा चाहते हैं तो यह खेती-बाड़ी जानकारी आपके लिए पूरी मार्गदर्शिका है।

💸 सरकारी सब्सिडी बड़ी, पर किसानों को असली राहत कब?

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किसानों को राहत कब? रबी 2025 सब्सिडी, बाजार रेट और मंडी की असली सच्चाई रबी 2025: सरकारी सब्सिडी बढ़ी, पर किसानों को असली राहत कब? केंद्र सरकार ने रवि मौसम 2025 26 के लिए उररकों कें खाद पर 37952 करोड रुपए की बड़ी सब्सिडी मंजूर की है यह राशि पिछले वर्ष की तुलना में 14000 करोड रुपए अधिक है सरकार का कहना है कि इससे किसानों को खाद सस्ती दर पर मिलेगी और खेती की लागत कम होग लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि आज भी कई किसान कह रहे हैं  हमारी फसल इतनी सस्ती दिखती है लेकिन खेती की हर चीज महंगी होती जा रही है  तू सवाल यह है कि इतनी बड़ी सब्सिडी के बावजूद किसानों को असली रहता कब और कैसे मिलेगी लिए इसे आसान भाषा में समझते हैं। सरकार ने क्या फैसला लिया है?  सरकार ने रवि 2025 26 के लिए फास्फोरस और पोटाश आधारित पड़ा जैसे डीएपी एनपीके एनपीकेएस पर सब्सिडी तैयार की है।  नाइट्रोजन पर सब्सिडी लगभग 43 रुपए प्रति किलोकिलो  फास्फोरस पर सब्सिडी लगभग 48 रुपए प्रति किलो  सरकार का उद्देश्य है कि: किसानों को खाद उचित मूल्य पर मिले खाद की कमी न हो  हर जिले और ब्लॉक तक खाद समय पर पहुंच...

💧 ड्रिप सिंचाई 2025 : कम पानी, ज्यादा मुनाफा

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ड्रिप सिंचाई 2025–26: कम पानी, अधिक हरियाली परिचय — बदलती खेती में "ड्रिप सिंचाई" की ताकत आज का खेतीबाड़ी जानकारी गाइड— आज खेती सिर्फ मिट्टी, बीज और मेहनत तक सीमित नहीं रही—अब स्मार्ट टेक्नोलॉजी, विज्ञान और संसाधन बचत वाली तकनीक का दौर है। ड्रिप सिंचाई (Drip Irrigation) किसानों के लिए क्रांतिकारी हथियार है— व्यावहारिक खेती अनुभव की डिटेल गाइड। यह भी पढ़ें –   शीतकालीन सब्जियां (कम लागत, अधिक मुनाफा) ड्रिप सिंचाई क्या है और कैसे काम करती है? यह विधि पाइप, ट्यूब, एमिटर और वाल्व से हर पौधे की जड़ में बूंद-बूंद पानी पहुंचाती है। हर पौधा अपने हिसाब से पौष्टिक पानी लेता है—न पानी बर्बाद, न घास-फूस बढ़े। BAIF-India ड्रिप टेक स्टोरी ड्रिप सिंचाई के मुख्य फायदे — किसान की नजर से पानी की बचत: पारंपरिक तरीकों में जहां कभी 100% पानी बर्बाद हो जाता है, वहीं ड्रिप से 40-60% तक पानी बचता है ( किसान सभा रिपोर्ट )। पैदावार में 20-30% तक बढ़ोतरी: पौधों को लगातार जरूरत अनुसार नमी और पोषण—बेहतर ग्रोथ। वीड व बीमारी पर नियंत्रण: पानी सिर्फ जड़ में, बाकी मिट्टी सूखी—खरपतवार कम। ...

🌿 शीतकालीन सब्ज़ियाँ 2025: पालक, मूली, मटर, गाजर, गोभी से कम लागत में बंपर कमाई

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शीतकालीन सब्ज़ियाँ: अक्टूबर–नवंबर में उगाएँ और तेज़ कमाएँ शीतकालीन सब्ज़ियाँ: अक्टूबर–नवंबर में कौन सी सब्जी उगाएँ और डेढ़ महीने में लाखों कमाएँ? आज खेतीबाड़ी जानकारी पर जानेंगे कि कैसे सर्दियों में पालक, मूली, मटर, गाजर, चुकंदर, सरसों, बंदगोभी, ब्रोकली, शलजम, हरा धनिया जैसी सब्ज़ियां – कम लागत में तेज घाटा भरने वाली फसल बन गई हैं। मौसम के अनुसार बीज, खेत तैयारी, जैविक खाद, कीट मुक्त प्रबंधन और सीधी मंडी बिक्री से हर किसान 45–60 दिन यानी डेढ़ महीने में आमदनी तेजी से बढ़ा सकता है। 1. अक्टूबर–नवंबर में सबसे ज्यादा डिमांड वाली सब्ज़ियाँ पालक, हरा धनिया, मूली, गाजर, मटर, चुकंदर, बाथुआ, मेथी। बंदगोभी, ब्रोकली, फूल गोभी, शलजम, सरसों साग। सर्दी में बुआई के लिए PH 6–7.5, दोमट–बलुई दोमट मिट्टी सही रहती है। 2. बीज चयन, जैविक उपचार और खेत की तैयारी ICAR/KVK प्रमाणित बीज – स्थानीय केंद्र या farmer.gov.in बुवाई से पहले बीज को जैविक ट्राइकोडर्मा, बाविस्टिन या नीमखली से ट्रीट करें। खेत में वर्मी कम्पोस्ट, राख, FYM खाद डालें और मिट्टी soilhealth.dac.gov.in से जांचें। 3. बुवा...

"रबी 2025-26: गेहूं, चना, मटर, मसूर बुवाई की आदर्श तकनीक, बीमारी, मशीनरी व MSP– हर भारतीय किसान के लिए पूरी गाइड"

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रबी 2025-26: गेहूं, चना, मटर, मसूर बुवाई का अखिल भारतीय किसान गाइड रबी 2025-26: गेहूं, चना, मटर, मसूर बुवाई का भारत किसान गाइड परिचय: क्यों है रबी की बुवाई महत्वपूर्ण? रबी फसलें (गेहूं, चना, मटर, मसूर) भारत के हर क्षेत्र की कृषि GDP को मजबूती देती हैं। खेतीबाड़ी जानकारी से पता चलेगा कैसे देशभर के किसान अब traditional तरीकों से आगे बढ़कर वैज्ञानिक और स्मार्ट प्रैक्टिस (बीज गुणवत्ता, मिट्टी जाँच, जागरूक सिंचाई) अपना रहे हैं। सरकार द्वारा DBT सब्सिडी, MSP, मंडी info, minikit का फायदा हर प्रदेश के किसान को एक समान उपलब्ध है। मिट्टी जाँच, PH व तैयारी (All India Common!) सैंपलिंग: खेत में 0-15cm की गहराई से clean soil ले, Soil Health Card पोर्टल से जाँच कराएं। PH अदर्श: गेहूं–चना 6.0–7.5, मटर–मसूर 6.0–7.2 (हर राज्य में यही ideal)। Acidic/Alkaline zones के लिए सुधार – जैविक खाद, Gypsum, Lime अपनाएँ। Field Prep: rotavator, laser leveling, harrow, आखिर में fmb (fine seedbed)—हर स्थिति पर काम करता है। बीज चयन, Processing, और बुवाई विधि यह भी पढ़ें – रबी की फसल बम्...

🌾रबी 2025-26 की बंपर खेती: मिट्टी जांच, जैविक और नैनो खाद से record फसल

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2025-26 मिट्टी परीक्षण, जैविक-नैनो खाद: किसान ROI गाइड  रबी फसल की सफलता का राज़: मिट्टी जांच 2025-26, नैनो व जैविक खाद, regionwise किसान गाइड परिचय: क्यों बदल रही है खेती की तस्वीर? यह भी पढ़ें –   मृदा स्वास्थ्य कार्ड   भारत में मिट्टी स्वास्थ्य, scientific fertilization और real-time कृषि सलाह देश की आर्थिक रीढ़ बन चुके हैं। 2025-26 के रबी सीजन में कृषि-जोनों (UP, महराष्ट्र, पंजाब, बिहार, मध्यभारत) में सबसे तेज़ बदलाव उन्हीं किसानों में दिख रहा है, जिन्होंने crop-specific soil-test, जैविक/नैनो उर्वरक का वैज्ञानिक उपयोग और मंडी/सरकारी registration/advisory को अपनाया। मिट्टी रिपोर्ट, फसल/region के हिसाब से पोषक प्रबंधन, और डायरेक्ट मंडी/ पोर्टल कनेक्शन – यही लगातर बढ़ती लागत, घटती पैदावार और जैविक स्थिरता के जवाब हैं। इस पोस्ट में – हर किसान के लिए step-by-step, regionwise और बिल्कुल updated गाइड, सफल किसान केस व काम की FAQ। मिट्टी जांच – कब, कैसे और regionwise असली फर्क भारत में 2022-2025 के बीच 19 करोड़ से ज़्यादा किसान soil test कार्ड से जुड़े। UP, पंजाब...

डिजिटल मंडी 2026: किसान के लिए नई राह, MSP और ई-नाम की पूरी जानकारी

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2026 में डिजिटल कृषि मार्केटिंग और ई-नाम किसान के लिए नया युग 👉  2026 में डिजिटल खेती 2026 में भारत की कृषि मार्केटिंग में डिजिटल सिस्टम एक पूर्ण बदलाव लेकर आया है। खेती-बाड़ी जानकारी पर आप जानेंगे कैसे ई-नाम पोर्टल द्वारा किसान अब देशभर की 1400+ मंडियों से सीधे जुड़ सकते हैं। ऑनलाइन बिक्री, रियल टाइम मंडी रेट, क्वालिटी टेस्टिंग, और डिजिटल पेमेंट ने छोटे-बड़े सभी किसानों को पारदर्शिता और बेहतर आमदनी दी है। ई-नाम क्या है? राष्ट्रीय कृषि बाजार (e-NAM) सरकार की डिजिटल मंडी सेवा है, जिसमें 1.7 करोड़ किसान रजिस्टर हैं। टमाटर, आलू, हल्दी जैसी फसलों की ऑनलाइन बोली, SMS अलर्ट, और पेमेंट सीधे बैंक में मिलती है। किसान को अब मंडी-मार्केटिंग के लिए दलाल या बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता ( सूचना )। रियल टाइम मंडी रेट, खरीददार का रिव्यू और सब ट्रांसपोर्ट डिजिटली ट्रैक किया जाता है। ग्रेडिंग लैब और फोटो अपलोड से किसान क्वालिटी साबित कर सकते हैं ( सत्य घटना )। UPI, BHIM, DBT जैसे डिजिटल पेमेंट से ट्रांजैक्शन 100% सुरक्षित होता है। 2026 में डिजिटल मंडी के लाभ हर किसान देश मे...

🌐 “2026 में डिजिटल खेती: ड्रोन, AI, सरकारी स्कीम से कैसे बदल रही किसानी”

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2026 में डिजिटल खेती : ड्रोन और AI कैसे बढ़ाएंगे फसलों की पैदावार परिचय  आज भारत के किसान नई डिजिटल खेती और स्मार्ट टेक्नोलॉजी की वजह से अपनी पैदावार, पानी व संसाधनों का बेहतर उपयोग कर रहे हैं। खेतीबाड़ी जानकारी के माध्यम से किसान जानेंगे कैसे AI, ड्रोन, सेंसर और सरकारी योजनाएँ – खेती को सही दिशा और लाभ देने में आगे हैं। 👉  मिट्टी की सेहत और सस्टेनेबल खेती   डिजिटल खेती क्या है ? डिजिटल खेती का मतलब है – मोबाइल, ड्रोन, सेन्सर, डेटा-एनालिटिक्स और AI की मदद से खेती करना। किसान मिट्टी/फसल/मौसम डेटा देखकर सही फैसला लेते हैं और सरकारी स्कीम सीधे मोबाइल पर मिल जाती है। 👉 स्मार्ट सिंचाई तकनीक: जल बचत से बड़े उत्पादन ड्रोन और AI टेक्नोलॉजी के फायदे ड्रोन से खेतों में पेस्टिसाइड/फर्टिलाइजर छिड़काव ऑटोमैटिक होता है, लागत और समय दोनों बचता है। AI आधारित ऐप्स बीमारी/नुकसान तुरंत पहचानते हैं, जिससे इलाज भी समय पर मिलता है। किसान मोबाइल/डाटा से बाजार भाव, मौसम, अनुदान, सब्सिडी की जानकारी ले सकते हैं। 👉 CRISPR तकनीक से उन्नत फसल किस्में और अधिक पैदावार महिला कि...

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