ज्वार की खेती कैसे करें 2026: बुवाई से कटाई तक पूरी जानकारी

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 ज्वार की खेती कैसे करें: बुवाई से कटाई तक पूरी जानकारी  ज्वार की खेती भारत के कई राज्यों में पारंपरिक रूप से की जाती है, और आज भी यह एक भरोसेमंद फसल पानी जाती है। कम पानी में तैयार होने होने वाली यहफसल अनाज के साथ-साथ पशु चारे के रूप में भी उपयोगी है। बदलते मौसम और बढ़तीलगत के दौर में ज्वार की तिथि किसानों के लिए कम जोखिम और स्थिर आय देने वाला विकल्प बन रही है। अगर आप ज्वार की खेती सही तरीके से करते हैं, तो कम लागत में अच्छी पैदावार और बेहतर मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं। इस खेती-बाड़ी जानकारी में हम ज्वार की खेती से जुडी पूरी जानकारी आसान भाषा में बताएंगे। 👉 कम पानी में उगने वाली फसलों की पूरी जानकारी ज्वार की खेती क्यों लाभदायक है? कम पानी में अच्छी फसल  सूखा भी सहन करने की क्षमता  अनाज और चारे दोनों के लिए उपयुक्त  बाजार में स्थिर मांग  पशुपालक किसानों के विशेष लाभदायक  इन्हीं कारणों से ज्वार की खेती छोटे और मध्यम किसानों के लिए बहुत फायदेमंद मानी जाती है। ज्वार के लिए उपयुक्त जलवायु और मिट्टी  ज्वार की खेती गर्म और शुष्क जलवायु में अच्छी होती ह...

रबी 2025-26 में खाद सब्सिडी बढ़ी: किसानों को असली फायदा कब मिलेगा?

किसानों को राहत कब? रबी 2025 सब्सिडी, बाजार रेट और मंडी की असली सच्चाई

रबी 2025: सरकारी सब्सिडी बढ़ी, पर किसानों को असली राहत कब?

सरकारी सब्सिडी बड़ी पर किसानों को राहत कब?

केंद्र सरकार ने रवि मौसम 2025 26 के लिए उर्वरकों और खाद पर 37952 करोड रुपए की बड़ी सब्सिडी मंजूर की है यह राशि पिछले वर्ष की तुलना में 14000 करोड रुपए अधिक है सरकार का कहना है कि इससे किसानों को खाद सस्ती दर पर मिलेगी और खेती की लागत कम होगी

लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि आज भी कई किसान कह रहे हैं:

हमारी फसल इतनी सस्ती बिकती है लेकिन खेती की हर चीज महंगी होती जा रही है।

तो सवाल यह है कि इतनी बड़ी सब्सिडी के बावजूद किसानों को असली राहत कब और कैसे मिलेगी लिए इसे आसान भाषा में समझते हैं।

सरकार ने क्या फैसला लिया है? 

सरकार ने रवि 2025-26 के लिए फास्फोरस और पोटाश आधारित खाद जैसे डीएपी, एनपीके, एनपीकेएस पर सब्सिडी तैयार की है। 

  • नाइट्रोजन पर सब्सिडी लगभग 43 रुपए प्रति किलो
  • फास्फोरस पर सब्सिडी लगभग 48 रुपए प्रति किलो 

सरकार का उद्देश्य है कि:

  • किसानों को खाद उचित मूल्य पर मिले
  • खाद की कमी न हो 
  • हर जिले और ब्लॉक तक खाद समय पर पहुंचे 

कागजों में यह फैसला किसानों के हित में है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति कुछ अलग नजर आती है। 

जमीनी हकीकत क्या है?

1. खाद पूरी तरह सस्ती नहीं मिलती 

  • कई जगह दुकानदार निर्धारित रेट से पैसा लेते हैं 
  • ट्रांसपोर्ट और भंडारण के नाम पर अतिरिक्त शुल्क जुड़ जाता है 
  • कई बार खाद की कमी बता कर ब्लैक मार्केटिंग होती है 

2. खेती की दूसरी लागत तेजी से बढ़ी

  • बीज महंगे
  • डीजल और बिजली महंगी
  • मजदूरी बड़ी

यानी खाद पर थोड़ी राहत मिलने के बाद भी कुल लागत कम नहीं हो पा रही है।

3. फसल का सही दाम नहीं मिल रहा

  • बहुत से किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर फसल नहीं बेच पाते
  • सरकारी खरीद केंद्र दूर होते हैं या सीमित मात्रा में खरीद होती है
  • निजी व्यापारी कम दाम पर खरीदते हैं

4. घटिया खाद और नकली माल

  • कई किसानों को नकली या कम गुणवत्ता वाली खाद मिल जाती है 
  • शिकायत करने पर कार्यवाही देर से होती है 

क्या एमएसपी से किसानों को असली राहत मिल सकती है?

MSP यानी कि वह कीमत है जिस पर सरकार फसल खरीदने का वादा करती है 

सरकार का कहना है कि:

  • खरीद केंद्र बढ़ाए जा रहे हैं
  • डिजिटल प्लेटफार्म के माध्यम से व्यापार को बढ़ावा दिया जा रहा है 
लेकिन किसानों का अनुभव यह है कि :

  • हर किसान को एसपी का लाभ नहीं मिल पाता
  • गुणवत्ता नमी या दस्तावेज के नाम पर फसल लौटा दी जाती है 

जब तक हर किसान को उसकी फसल का सही दाम नहीं मिलेगा तब तक खाद सब्सिडी का पूरा फायदा महसूस नहीं होगा

सरकार की दूसरी योजनाएं कितनी मदद मिलती है?

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि 

  • साल में ₹6000 की सहायता
  • कई किसानों को समय पर किस्त मिलती है
  • कुछ जगह नाम, बैंक या आधार से जुड़ी समस्याएं रहती हैं 

फसल बीमा योजना 

  • नुकसान होने पर बीमा का पैसा मिलना चाहिए
  • कई बार भुगतान में देरी होती है 

ऑनलाइन कृषि सेवाएं

  • बाजार भाव देखने की सुविधा
  • योजनाओं की जानकारी 

इन योजनाओं से मदद तो मिलती है लेकिन प्रक्रिया सरल और तेज होनी चाहिए

किसान वास्तव में क्या चाहते है?

किसानों की मुख्य मांगें हैं:

  • खाद सही रेट पर और समय से मिलना चाहिए
  • फसल का सही दाम मिले
  • पैसा सीधे और समय पर खाते में पहुंचे
  • नकली खाद और कालाबाजारी पर सख्त कार्यवाही हो
 किसानों का मानना है कि अगर यह चार बातें ठीक हो जाए तो खेती काफी हद तक फायदे का सौदा बन सकती है।

समाधान क्या हो सकता है?

1.खाद वितरण पर सख्त निगरानी

  • हर दुकान पर रेट लिस्ट लगाई जाए
  • शिकायत के लिए हेल्पलाइन सक्रिय हो

2. सरकारी खरीद मजबूत हो

  • हर गांव के पास खरीद केंद्र हों
  • सीमित मात्रा की बाध्यता हटे

3. किसान जागरूक बने

  • राशिद जरूर लें
  • गलत रेट पर शिकायत करें
  • योजनाओं की जानकारी रखें

4. सामूहिक प्रयास

  • किसान समूह बनाकर खरीद बिक्री करें
  • इससे सौदे की ताकत बढ़ती है

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल FAQs 

Q1. क्या डीएपी और एनपीके खाद सस्ती मिलेगी?

सरकार ने सब्सिडी बढ़ाई है लेकिन हर जगह सही रेट मिले इसके लिए निगरानी जरूरी है।

Q3. क्या हर किसान को MSP मिलेगा?

अभी नहीं, लेकिन सरकारी खरीद केंद्र से कोशिश की जा सकती है।

Q4. फसल बीमा का पैसा देर से आए तो क्या करें?

कृषि विभाग या बीमा कंपनी में शिकायत दर्ज करें।

निष्कर्ष

रबी 2025-26 के लिए खाद पर बड़ी हुई सब्सिडी एक अच्छा कदम है लेकिन इससे किसानों को तभी असली राहत मिलेगी जब:

  • खाद सही दाम पर मिले
  • फसलों का मूल्य बेहतर मिले
  • योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचे 

सिर्फ घोषणा से ही नहीं बल्कि मजबूत व्यवस्था से ही किसान की हालत सुधरेगी।

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