ज्वार की खेती कैसे करें 2026: बुवाई से कटाई तक पूरी जानकारी

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 ज्वार की खेती कैसे करें: बुवाई से कटाई तक पूरी जानकारी  ज्वार की खेती भारत के कई राज्यों में पारंपरिक रूप से की जाती है, और आज भी यह एक भरोसेमंद फसल पानी जाती है। कम पानी में तैयार होने होने वाली यहफसल अनाज के साथ-साथ पशु चारे के रूप में भी उपयोगी है। बदलते मौसम और बढ़तीलगत के दौर में ज्वार की तिथि किसानों के लिए कम जोखिम और स्थिर आय देने वाला विकल्प बन रही है। अगर आप ज्वार की खेती सही तरीके से करते हैं, तो कम लागत में अच्छी पैदावार और बेहतर मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं। इस खेती-बाड़ी जानकारी में हम ज्वार की खेती से जुडी पूरी जानकारी आसान भाषा में बताएंगे। 👉 कम पानी में उगने वाली फसलों की पूरी जानकारी ज्वार की खेती क्यों लाभदायक है? कम पानी में अच्छी फसल  सूखा भी सहन करने की क्षमता  अनाज और चारे दोनों के लिए उपयुक्त  बाजार में स्थिर मांग  पशुपालक किसानों के विशेष लाभदायक  इन्हीं कारणों से ज्वार की खेती छोटे और मध्यम किसानों के लिए बहुत फायदेमंद मानी जाती है। ज्वार के लिए उपयुक्त जलवायु और मिट्टी  ज्वार की खेती गर्म और शुष्क जलवायु में अच्छी होती ह...

सितंबर में बोई जाने वाली फसलें 2025: लहसुन, चना, मटर, मसूर की पूरी खेती गाइड


🌾 सितंबर में बोई जाने वाली प्रमुख फसलें: बीज से बिक्री तक पूरी जानकारी (2025 गाइड)

सितंबर में बोई जाने वाली फसलें – लहसुन, चना, मटर और मसूर की खेती


परिचय 

सितंबर का महीना खरीफ फसलों के बाद रबी सीजन की तैयारी का सबसे अहम समय होता है। इस दौरान लहसुन, चना, मटर और मसूर जैसी फसलें बोकर किसान कम लागत में अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।

अगर मिट्टी की सही तैयारी, बीज उपचार, संतुलित खाद, सही सिंचाई और समय पर रोग कीट नियंत्रण किया जाए तो इन फसलों में 30 – 40% तक लाभ संभव है। 

इस खेती-बाड़ी जानकारी में आप जानेंगे –

✔️कौन सी फसल किस मिट्टी में बेहतर है

✔️सही बीज और बुवाई की तकनीक 

✔️खाद, सिंचाई, रोग-कीट प्रबंधन 

✔️कटाई, भंडारण और बिक्री के तरीके

1️⃣ मिट्टी और pH की सही जानकारी 

उपयुक्त मिट्टी और उसका pH


🔷 लहसुन

  • मिट्टी: हल्की दोमट, जैविक पदार्थ से भरपूर
  • pH: 6.0–7.5

🔷 चना

  • मिट्टी: हल्की दोमट, नमी वाली
  • pH: 6.5–8.0

🔷 मटर

  • मिट्टी: अच्छी जल निकासी वाली दोमट
  • पीएच: 6.0–7.0

🔷 मसूर

  • मिट्टी: मध्यम उपजाऊ, गहरी
  • पीएच: 6.0–7.5

👉 बुवाई से पहले मिट्टी की जांच करना सबसे बेहतर रहता है।

सरसों की खेती 2025

👉 मिट्टी की जांच कैसे करें? घरेलू और वैज्ञानिक उपाय

2️⃣ बीज चयन और बीज उपचार 

कौनसा बीज चुनें?


✔️उन्नत किस्में 

  • लहसुन: एग्रीफाउंड व्हाइट, यमुनासफेद-3, जी-282
  • चना: जीएनजी-1581, पूसा-362, काबुली (पीकेवी कबुली)
  • मटर: अरक हरित, रचाना, पूसा प्रगति
  • मसूर: के-75, पूसा वैभव

✔️बीज उपचार (ट्रीटमेंट) क्यों जरूरी?

अगर बीज बिना ट्रीटमेंट बोया जाए तो उसमें उकठा, झुलसा और अन्य बीज जनित बीमारियाँ लगने का खतरा रहता है। ट्रीटमेंट करने से रोग रुकते हैं और अंकुरण बढ़ता है।

✔️कैसे करें बीज उपचार?


  • रासायनिक:

  1. थायरम 3 ग्राम या कार्बेन्डाजिम 2.5 ग्राम / किलो बीज
  • जैविक:

  1. ट्राइकोडर्मा 4–5 ग्राम / किलो बीज

👉 पहले रासायनिक, फिर जैविक उपचार करें।

👉 इस खेती के लिए सरकारी उन्नत बीज मार्गदर्शिका

3️⃣ बुबाई का सही समय और दूरी

बुवाई का सही समय और तकनीक


समय:

सितंबर के अंतिम सप्ताह से अक्टूबर मध्य तक

दूरी:

  • लहसुन:

  1. कतार से कतार 15–20 सेमी
  2. कली से कली 8–10 सेमी

  • चना: 30–45 सेमी
  • मटर: 30 सेमी
  • मसूर: 20–25 सेमी

मशीन

  • 👍🏻 सीड ड्रिल या जीरो टिल सीड ड्रिल से बुवाई सबसे बेहतर।

4️⃣ खाद और पोषण प्रबंधन

खाद और पोषण प्रबंधन


🔷 लहसुन

  • गोबर की खाद: 8–10 टन/हेक्टेयर (बुवाई से पहले)
  • DAP: 150 किलो/हेक्टेयर (बेसल)
  • पोटाश: 60 किलो/हेक्टेयर (बेसल)
  • सल्फर: 20–25 किलो/हेक्टेयर
  • यूरिया: 80–100 किलो/हेक्टेयर (2 बार में, 30 और 60 दिन बाद)

🔷 चना

  • डीएपी: 100 किलो/हेक्टेयर
  • यूरिया: 20 किलो/हेक्टेयर (यदि नमी कम हो तो)
  • सल्फर: 20 किलो/हेक्टेयर

🔷 मटर

  • DAP: 100 किलो/हेक्टेयर
  • यूरिया: 40 किलो/हेक्टेयर
  • पोटाश: 40 किलो/हेक्टेयर

🔷 मसूर

  • डीएपी: 80 किलो/हेक्टेयर
  • सल्फर: 20 किलो/हेक्टेयर

5️⃣ सिंचाई प्रबंधन

खेती में सिंचाई प्रबंधन


लहसुन

  • बुवाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई
  • फिर 10–12 दिन के अंतराल पर
  • गांठ बनने के समय सिंचाई जरूरी

चना

  • बुवाई के समय नमी
  • फूल और दाना बनने पर 2–3 सिंचाई

मटर

  • बुवाई के 20 दिन बाद पहली सिंचाई
  • फिर 15–20 दिन पर

मसूर 

  • आमतौर पर कम पानी
  • फूल और दाना बनने पर 1–2 सिंचाई

⚠️ पानी का पीएच 6.0–7.5 आदर्श।

👉 कम पानी में उगने वाली फसलें

👉 स्मार्ट सिंचाई: जल बचत से बड़े उत्पादन

6️⃣ रोग और कीट प्रबंधन

🔶 लहसुन

  • झुलसा रोग:
  • मैनकोजेब 75% WP @ 2.5 ग्राम/लीटर पानी

  • थ्रिप्स:
  • इमिडाक्लोप्रिड 17.8% SL @ 200 मिली/हेक्टेयर
  • जैविक 
  • नीम तेल 1500 PPM @ 5 मिली/लीटर

🔶 चना

  • फली छेदक:
  • इंडोक्साकार्ब 14.5% SC @ 300 मिली/हेक्टेयर


  • जैविक:
  • बवेरिया बेसियाना @ 5 ग्राम/लीटर

🔶 मटर

  • झुलसा रोग:
  • मैनकोजेब 75% WP @ 2.5 ग्राम/लीटर पानी

  • जैविक:
  • ऐसीट्राइकोडर्मा @ 5 ग्राम/लीटर

🔶 मसूर

  • झुलसा रोग:
  • कार्बेन्डाजिम 50% WP @ 1 ग्राम/लीटर पानी
  • जैविक
  • नीम खली @ 250 किलो/हेक्टेयर

7️⃣ खरपतवार नियंत्रण

फसल में खरपतवार नियंत्रण कैसे करें?


लहसुन/चना/मटर/मसूर

  • पेंडीमेथालिन 30% EC @ 1 लीटर/हेक्टेयर 
  • बुवाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई में छिड़कें
  • 1 एकड़ = 5–6 टंकी
  • 20 लीटर टंकी = 150–200 मिली दवा

8️⃣ पैदावार, कटाई और भंडारण 

खेती में पैदावार, कटाई और लागत


संभावित उपज

  • लहसुन: 70–100 क्विंटल/हेक्टेयर
  • चना: 8–10 क्विंटल/एकड़
  • मटर: 10–12 क्विंटल/एकड़
  • मसूर: 6–8 क्विंटल/एकड़

👉 लागत क्षेत्र अनुसार अलग-अलग होती है, लेकिन अच्छी देखभाल से किसान 30–40% तक शुद्ध मुनाफा कमा सकते हैं।

कटाई

  • लहसुन: 140–160 दिन, गांठ सूखने पर कटाई करें
  • चना: 120–130 दिन
  • मटर: 100–110 दिन
  • मसूर: 110–120 दिन

👉लहसुन को 5–7 दिन छाया में सुखाकर जालदार थैलों में रखें।

9️⃣ बिक्री और सरकारी सुविधाएं

फसल कहां बेचें?


  • चना, मटर, मसूर  सरकारी MSP पर खरीदी जाती हैं
  • लहसुन → मंडी, आढ़ती, e-NAM या कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग से बेचना बेहतर
  • योजनाएं:
  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना 
  • किसान सम्मान निधि 
  • कृषि यंत्र सब्सिडी योजना

❓ FAQs 

Q1. सितंबर में कौन-सी फसल बोना सबसे ज्यादा फायदेमंद है?

👉 सितंबर में लहसुन, चना, मटर और मसूर सबसे सुरक्षित और मुनाफेदार फसलें मानी जाती हैं।

Q2. क्या सितंबर में बोई गई फसलों पर सरकारी MSP मिलती है?

👉 चना, मटर और मसूर पर MSP मिलता है, जबकि लहसुन को मंडी, eNAM या कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग से बेचना बेहतर रहता है।

Q3. सितंबर की फसलों में बीज ट्रीटमेंट जरूरी क्यों है?

👉 बीज ट्रीटमेंट से अंकुरण बढ़ता है, रोग कम लगते हैं और फसल की शुरुआती बढ़वार मजबूत होती है।

Q4. क्या सितंबर में बोई गई फसलों को ज्यादा पानी चाहिए?

👉 नहीं, ये फसलें कम सिंचाई में भी अच्छी उपज देती हैं, बस समय पर पानी जरूरी है।

🔟 निष्कर्ष

सितंबर में बोई जाने वाली फसलें – लहसुन, चना, मटर, मसूर – किसानों के लिए सुरक्षित और लाभकारी विकल्प हैं। अगर किसान सही समय पर बुवाई, बीज उपचार, संतुलित खाद, उच्च सिंचाई और रोग कीट नियंत्रण करें तो, कम लागत में अच्छी उपज और बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं। सरकारी योजनाओं और आधुनिक बाजार विकल्पों का सही उपयोग किसान की आमदनी बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाता है।

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