ज्वार की खेती कैसे करें 2026: बुवाई से कटाई तक पूरी जानकारी

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 ज्वार की खेती कैसे करें: बुवाई से कटाई तक पूरी जानकारी  ज्वार की खेती भारत के कई राज्यों में पारंपरिक रूप से की जाती है, और आज भी यह एक भरोसेमंद फसल पानी जाती है। कम पानी में तैयार होने होने वाली यहफसल अनाज के साथ-साथ पशु चारे के रूप में भी उपयोगी है। बदलते मौसम और बढ़तीलगत के दौर में ज्वार की तिथि किसानों के लिए कम जोखिम और स्थिर आय देने वाला विकल्प बन रही है। अगर आप ज्वार की खेती सही तरीके से करते हैं, तो कम लागत में अच्छी पैदावार और बेहतर मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं। इस खेती-बाड़ी जानकारी में हम ज्वार की खेती से जुडी पूरी जानकारी आसान भाषा में बताएंगे। 👉 कम पानी में उगने वाली फसलों की पूरी जानकारी ज्वार की खेती क्यों लाभदायक है? कम पानी में अच्छी फसल  सूखा भी सहन करने की क्षमता  अनाज और चारे दोनों के लिए उपयुक्त  बाजार में स्थिर मांग  पशुपालक किसानों के विशेष लाभदायक  इन्हीं कारणों से ज्वार की खेती छोटे और मध्यम किसानों के लिए बहुत फायदेमंद मानी जाती है। ज्वार के लिए उपयुक्त जलवायु और मिट्टी  ज्वार की खेती गर्म और शुष्क जलवायु में अच्छी होती ह...

धान की खेती में बाली निकलने की अवस्था | गर्भावस्था में सही देखभाल से बढ़ाएं उपज

 🌾 धान की खेती में बाली निकलने की अवस्था (गर्भावस्था): सही देखभाल से बढ़े पदावार 15-20%

धान की फसल में बाली निकलने की अवस्था, स्वस्थ पौधे और हरी पत्तियां

👉 भारत में धान की खेती: जमीन, जलवायु और उत्पादन की पूरी जानकारी

बाली निकलने की अवस्था क्या होती है?

धान में बाली निकलने की अवस्था


धान की फसल में बाली निकलने की अवस्था को गर्भावस्था कहा जाता है। यह बुवाई के लगभग 60–70 दिन बाद आती है। इस समय पौधे के अंदर बाली का निर्माण होता है और यही अवस्था भविष्य की उपज और दाने की गुणवत्ता तय करती है।

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इस अवस्था का महत्व क्यों सबसे ज्यादा है?

  • दानों की संख्या और भराव इसी समय सुनिश्चित होता है
  • पौधे को संतुलित पानी और पोषण न मिले तो उपज में भारी कमी हो सकती है
  • कीट व रोग का प्रकोप इसी समय सबसे ज्यादा होता है
  • सही देखभाल से 15-20% तक उपज बढ़ाई जा सकती है

✅  इस अवस्था में सही देखभाल कैसे करें?


धान में बाली निकलने की अवस्था पर खाद, पानी और रोग नियंत्रण


💧 जल प्रबंधन

  • खेत में लगातार नमी बनाए रखें
  • पानी का रुकाव न होने दें
  • बहुत ज्यादा सूखा या पानी दोनों ही नुकसानदायक हैं 

🌱 खाद प्रबंधन

  • यूरिया की अंतिम खुराक इसी समय दें
  • जिंक सल्फेट 21% (10 किलो/एकड़)
  • सल्फर (10–12 किलो/एकड़) का छिड़काव करें।

👉 इससे:

  • बाली मजबूत बनती है 
  • दाने अच्छे से भरते हैं 
  • पौधा तनाव से बचता है 

🦠 रोग नियंत्रण

इस समय ब्लास्ट और झुलसा रोग का खतरा सबसे अधिक रहता है।

  • झुलसा रोग रोकने के लिए Tricyclazole 75% WP (Beam, Tata Rallis) 120 ग्राम/एकड़।
  • भूरा धब्बा और ब्लास्ट रोकने के लिए Hexaconazole 5% SC (Contaf, Rallis) 200 ml/एकड़।

🐛 कीट नियंत्रण

मुख्य कीट:

  • पत्ती लपेटक
  • तना छेदक
प्रभावी दवा:
  • Chlorantraniliprole 18.5% SC (Coragen, FMC) 60 ml/एकड़।

समय पर छिड़काव से बाली सुरक्षित रहती है।

👉 सरकारी कीट नियंत्रण सहायता

👉 धान की खेती में कीट, रोग और उनकी घरेलू रोकथाम

✅ किसानों के लिए सुझाव

किसानों के लिए सुझाव

  • इस अवस्था में पौधे को भरपूर पोषण और सुरक्षा दें
  • खाद और दवा हमेशा सुबह या शाम को छिड़कें 
  • एक साथ बहुत ज्यादा दवा मिलाकर स्प्रे न करें 
  • हर 3-4 दिन में खेत का निरीक्षण जरूर करें
  • इस समय कोई भी लापरवाही सीधे पैदावार घट देती है
खेतीबाड़ी जानकारी पर हम समय पर खाद व दवाओं का छिड़काव करने समस्याओं का समाधान करने में मदद करते हैं जिससे किसानों की फसल में दाने मजबूत और भरे हुए बनते हैं और उपज में 15–20% तक बढ़ोतरी संभव है।
👉 40-45 दिन की धान की खेती की देखभाल

निष्कर्ष 

धान की खेती में बाली निकलने की अवस्था सबसे निर्णायक चरण होती है।
अगर इस समय पानी, खाद और कीट रोग प्रबंधन सही तरीके से किया जाए, तो:
✔️दाने भरपूर बनते हैं 
✔️बाली मजबूत होती है
✔️15-20% तक पैदावार बढ़ना संभव है 

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