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ज्वार की खेती कैसे करें 2026: बुवाई से कटाई तक पूरी जानकारी

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 ज्वार की खेती कैसे करें: बुवाई से कटाई तक पूरी जानकारी  ज्वार की खेती भारत के कई राज्यों में पारंपरिक रूप से की जाती है, और आज भी यह एक भरोसेमंद फसल पानी जाती है। कम पानी में तैयार होने होने वाली यहफसल अनाज के साथ-साथ पशु चारे के रूप में भी उपयोगी है। बदलते मौसम और बढ़तीलगत के दौर में ज्वार की तिथि किसानों के लिए कम जोखिम और स्थिर आय देने वाला विकल्प बन रही है। अगर आप ज्वार की खेती सही तरीके से करते हैं, तो कम लागत में अच्छी पैदावार और बेहतर मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं। इस खेती-बाड़ी जानकारी में हम ज्वार की खेती से जुडी पूरी जानकारी आसान भाषा में बताएंगे। 👉 कम पानी में उगने वाली फसलों की पूरी जानकारी ज्वार की खेती क्यों लाभदायक है? कम पानी में अच्छी फसल  सूखा भी सहन करने की क्षमता  अनाज और चारे दोनों के लिए उपयुक्त  बाजार में स्थिर मांग  पशुपालक किसानों के विशेष लाभदायक  इन्हीं कारणों से ज्वार की खेती छोटे और मध्यम किसानों के लिए बहुत फायदेमंद मानी जाती है। ज्वार के लिए उपयुक्त जलवायु और मिट्टी  ज्वार की खेती गर्म और शुष्क जलवायु में अच्छी होती ह...

🥕 "गाजर, मूली और सलाद पत्ता की मिश्रित खेती: आधुनिक तकनीकों के साथ अधिकतम उत्पादन"

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गाजर, मूली और सलाद पत्ता की  एक साथ आधुनिक खेती 👉आधुनिक समय में सरकार सब्जी उत्पादन में काफी सहयोग दिखा रही है। परिचय  गाजर, मूली और सलाद पत्ता तीनों ऐसी सब्जियां हैं, जिनकी एक ही मौसम में एक साथ खेती करना संभव है।  सभी किसान भाई खेती-बाड़ी जानकारी के द्वारा नीचे दिए गए बिंदुओं से इस आधुनिक खेती के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

☘️ धनिया, पालक और मेथी की उन्नत खेती: आधुनिक तकनीक से अधिक उत्पादन और मुनाफा

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धनिया, पालक और मेथी की उन्नत खेती: आधुनिक तकनीक से लाभ

आधुनिक तरीके से बैंगन की खेती | ड्रिप, मल्चिंग और अधिक उत्पादन

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आधुनिक तरीके से बैंगन की खेती

🍆 "ग्राफ़्टेड बैंगन की आधुनिक खेती: तकनीक, लाभ और नर्सरी स्रोत"

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🌱 ग्राफ़्टेड बैंगन की आधुनिक खेती–2025 📖 परिचय बैंगन भारत की प्रमुख सब्ज़ियों में से एक है। खेतीबाड़ी जानकारी  पर हम किसानों को  बताते हैं कि कैसे पारंपरिक खेती में रोग, कीट और मिट्टी से जुड़ी समस्याओं के कारण उत्पादन प्रभावित होता है और कैसे किसान भाईयों को इससे निजात मिलेगी । ग्राफ़्टेड बैंगन की खेती में उच्च उत्पादक किस्म को रोग-प्रतिरोधी जड़ वाले पौधे पर जोड़ा जाता है। यह तकनीक अधिक उत्पादन, बेहतर गुणवत्ता और रोग सहिष्णुता देती है। 🌿 ग्राफ़्टिंग का महत्व मिट्टी जनित रोग जैसे बैक्टीरियल विल्ट, फ्यूजेरियम विल्ट और नेमाटोड से सुरक्षा। पौधों की जीवन अवधि और सहनशीलता में वृद्धि। अधिक उत्पादन और बेहतर गुणवत्ता वाले फल। रासायनिक दवाओं पर निर्भरता में कमी। जलवायु परिवर्तन और प्रतिकूल परिस्थितियों में बेहतर प्रदर्शन। 🌿 उपयुक्त रूटस्टॉक जंगली बैंगन (Solanum torvum) टमाटर या अन्य सोलानेसी कुल की रोग-प्रतिरोधी प्रजातियाँ स्थानीय रोग-प्रतिरोधी बैंगन किस्में 🔧 ग्राफ्टिंग की विधि नर्सरी में rootstock और scion को अलग ट्रे में 20–30 दिन के पौधे बनाएं। ...

"धान में रोगों की पहचान और प्रभावी उपचार: बेहतर पैदावार के लिए समाधान"

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  धान में रोगों की पहचान और उपचार  "धान की खेती में रोगों की पहचान और उनका सही समय पर उपचार पैदावार को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस ब्लॉग में हमने धान में होने वाले प्रमुख रोगों के लक्षण, कारण और प्रभावी उपचार पर विस्तृत जानकारी दी है, ताकि किसान सही समय पर उचित कदम उठा सकें।" 1. सफेदपन (White Pan Disease) पहचान: लक्षण : पौधों की पत्तियाँ पीली पड़ जाती हैं और विकास रुक जाता है। बालियाँ छोटे और असामान्य हो सकती हैं। उपचार: Carbendazim (फफूंदनाशक) मात्रा : 1-2 ग्राम प्रति लीटर पानी। उपयोग विधि : प्रभावित पौधों पर छिड़काव करें। सप्ताह में एक बार छिड़काव करें जब तक रोग नियंत्रित न हो जाए। Mancozeb (फफूंदनाशक) मात्रा : 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी। उपयोग विधि : प्रभावित क्षेत्रों पर छिड़काव करें। सप्ताह में एक बार दोहराएं। 2. पत्तियों का रोलर रोग (Leaf Roller Disease) पहचान: लक्षण : पत्तियाँ मोड़ी हुई और घुमावदार दिखाई देती हैं। पत्तियों पर छोटे-छोटे भूरे या पीले धब्बे हो सकते हैं। उपचार: Chlorantraniliprole (कीटनाशक) मात्रा : ...

🌾 "गेहूं की खेती: एक सफल और लाभकारी फसल के लिए सम्पूर्ण मार्गदर्शिका"

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गेहूं की खेती: एक सम्पूर्ण मार्गदर्शिका परिचय : गेहूं, भारत की प्रमुख फसलों में से एक है, जो न केवल भोजन का मुख्य स्रोत है बल्कि कई खाद्य उत्पादों में भी उपयोग होती है। खेती-बाड़ी जानकारी पर सभी किसान भाइयों को गेहूं उत्पादन, गेहूं बुवाई एवं अन्य फसलों की बेहतर से बेहतर जानकारी मिलेगी।

40-45 दिन बाद धान की खेती: घास, रोग, कीट और निगरानी के लिए महत्वपूर्ण सुझाव

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40-45 दिन बाद धान की खेती में ध्यान देने वाली  बातें पोषक तत्वों का उपयोग :  सल्फर : 20 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर। नाइट्रोजन : 60 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर। पोटाश : 40 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर।

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“जलवायु अनुकूल खेती 2026 – कम लागत, सुरक्षित उत्पादन और नई तकनीकें”