- खेत में 2-3 सेमी तक पानी बनाए रखें
- मिट्टी पूरी तरह सूख न पाए
- लंबे समय तक पानी भर न रहने दे
👉व्यावहारिक सुझाव:
जहां खेत में पानी रुकता हो वहां छोटे नाल या निकास जरूर बनाएं इससे जड़ों की सक्रियता बनी रहती है।
🌱खरपतवार नियंत्रण (Weed Control)
20 से 25 दिन की व्यवस्था पर खरपतवार सबसे अधिक नुकसान पहुंचाते हैं क्योंकि इसी समय पौधों की पोषक तत्वों की मांग बढ़ जाती है।
खरपतवार से होने वाले नुकसान:
- खाद और पानी की प्रतिस्पर्धा
- पौधों की बढ़वार रुकना
- कल्लों की संख्या कम होना ।
नियंत्रण के सुरक्षित तरीके- पत्ता लपेटक
- तना छेदक
- फुदका
कीट प्रबंधन का सही तरीका:
- हर दो-तीन दिन में खेत का निरीक्षण करें।
- कीट दिखाई देने पर ही दवा का प्रयोग करें।
- बिना आवश्यकता दवा डालने से प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है।
कीटनाशक विकल्प:
प्रमुख रोग:
रोग नियंत्रण:
- मैंकोजेब
- बोर्डो मिक्सचर (जैविक और सुरक्षित विकल्प)
👉 याद रखें:
पहले रोग/कीट की पहचान करें, फिर दवा चुने। गलत दवा नुकसान बढ़ा सकती है।
🌾 खाद और यूरिया का संतुलित उपयोग
(Fertilizer and Urea Application)
20–25 दिन की अवस्था में पौधों को तेज बढ़वार और करले निर्माण के लिए संतुलित पोषण चाहिए।
इस समय आवश्यक पोषक तत्व:
- नाइट्रोजन – पत्तियों और बढ़वार के लिए
- फास्फोरस – जड़ों के विकास के लिए
- पोटाश – पौधों की मजबूती के लिए
मुख्य खाद:
यूरिया का सही उपयोग:
- प्रति हेक्टेयर 100 से 150 किलोग्राम क्षेत्र और किस्म के अनुसार
- खेत में हल्की नमी हो तभी खाद डालें
- खाद डालने के बाद हल्की सिंचाई करें
⚠️ अधिक यूरिया के नुकसान:
- रोगों की संभावना बढ़ती है
- फसल गिरने का खतरा रहता है
सूक्ष्म पोषक तत्व प्रबंधन
(Micronutrient Management)
यदि पौधों में:
- पत्तियां पीली हों
- बढ़वार धीमी हो
- जड़ कमजोर दिखे
तो यह जिंक या बोरान की कमी का संकेत हो सकता है।
समाधान:
- जिंक सलट
- बोरान (केवल आवश्यकता अनुसार)
🌿 जैविक खाद का महत्व (Role of Organic fertilizer)
जैविक खाद्य मिट्टी की लंबे समय की उर्वरता बनाए रखने में मदद करती है।
उपयोगी जैविक विकल्प:
- वर्मी कपोस्ट
- गोबर की खाद
- जीवामृत
👉जैविक खाद से मिट्टी की संरचना सुधरती है और रासायनिक खाद पर निर्भरता घटती है।
👀 फसल की नियमित निगरानी (Crop Health Monitoring)
- हर दो तीन दिन में खेत का निरीक्षण करें।
- कमजोरी या रोग ग्रस्त पौधों को पहचानो।
- पानी और पोषण की स्थिति जांचते रहें।
👉 समय पर पहचान से बड़ा नुकसान रोका जा सकता है।
⚠️ अन्य आवश्यक सावधानियां (Additional Precautions)
- मिट्टी की नमी संतुलित रखें।
- बहुत अधिक या बहुत कम नमी दोनों नुकसानदायक हैं।
- पूरे खेत में पानी का वितरण सामान रखें।
फसल की वृद्धि और स्वास्थ्य (Crop Growth and Health)
- पौधों की जांच: पौधों की नियमित निगरानी करें और कमजोर या प्रभावित पौधों पर विशेष ध्यान दें।
- समर्थन: अगर पौधे झुक रहे हैं या गिर रहे हैं, तो उन्हें सीधा करने के लिए उचित समर्थन प्रदान करें।
अन्य सावधानियाँ (Other Precautions)
- समान पानी वितरण: पानी का समान वितरण सुनिश्चित करें ताकि सभी पौधों को एक जैसा लाभ मिले।
FAQs
Q. धान की फसल में कितना पानी देना चाहिए?
धान की फसल में नियमित पानी रखें जिससे पौधों की जड़ों को नमी मिलती रहे। अधिक जल भराव से बचें।
Q. क्या धान की फसल में रोगों से निजात मिल सकती है?
जी बिल्कुल। अच्छे से निगरानी रखने पर और अच्छा उपचार देने पर धान के सभी रोग और कीट से निजात मिल सकती है।
Q. धान की फसल में रेनगन के इस्तेमाल से क्या फायदा है?
अगर किसान धान की फसल में रैनगन का इस्तेमाल करते हैं तो पानी की करीब 30% से 40% बचत होती है।
निष्कर्ष
अगर धान की फसल का किसान 20 से 25 दिन पर ऐसी देखभाल करता है तो फसल अच्छी ग्रोथ करती है। पौधों में कल्ले अधिक निकलते हैं, किट और रोगों से बचाव होता है और उत्पादन भी बेहतर होता है।
धान की 20 से 25 दिन पर की गई देखभाल ही किसान को आगे की फसल सुरक्षित रखने में मदद करती है।
- कल्लों की संख्या बढ़ती है
- फौजी मजबूत बनते हैं।
- किट और रोग का खतरा कम होता है।
- और उत्पादन में स्पष्ट बढ़ोतरी होती है
अगर आपका कोई सवाल या सुझाव है तो हमें नीचे दिए गए ईमेल पर मैसेज करें।
jankarikhetibadi@gmail.com