💧 कम पानी में उगने वाली फसलें: सूखे में भी मुनाफा (2025 किसान गाइड)
खेती-बाड़ी जानकारी किसानों के लिए समर्पित एक कृषि ज्ञान मंच है, जहाँ फसल उत्पादन, कीट एवं रोग प्रबंधन, सिंचाई तकनीक, बीज चयन और आधुनिक खेती के तरीकों की भरोसेमंद जानकारी सरल हिंदी भाषा में दी जाती है।
हर साल धान की कटाई के बाद खेतों में बची पराली किसानों के लिए बड़ी समस्या बन जाती है। बहुत से किसान मजबूरी में पराली जला देते हैं, जिससे वायु प्रदूषण बढ़ता है, मिट्टी की ताकत घटती और अब जुर्माने का खतरा भी रहता है। सरकार चाहती है कि किसान पराली न जलाएं और इसके लिए कई योजनाएं, सब्सिडी और मशीनें उपलब्ध कराई जा रही हैं।
केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर फसल अवशेष प्रबंधन योजना (CRM योजना) चला रही हैं। इसके तहत किसानों को आधुनिक मशीनों पर सब्सिडी दी जाती है।
अगर किसान मशीन खरीदना नहीं चाहता तो:
आज कई निजी कंपनियाँ और स्टार्टअप:
महराजगंज जिले के किसान रामलाल पटेल पहले हर साल पराली जलाते थे। 2023 में गांव की पंचायत ने बेलर और मल्चर मशीन किराए पर उपलब्ध कराई।
उन्होंने 2 एकड़ खेत की पराली के गट्ठर बनवाए और प्रति गट्ठर 400 रुपए में बेचे। कुल लगभग 32,000 रुपए की अतिरिक्त कमाई हुई।
अब उनके गांव के अधिकतर किसान मशीन किराए पर लेकर पराली बेचते हैं और समय पर अगली फसल बो पाते हैं।
Q1. पराली ना जलने पर क्या फायदा?
👉 जुर्माना नहीं लगेगा, मिट्टी सुधरेगा और पराली बेचकर कमाई भी होगी।
Q2. क्या हर किसान को सब्सिडी मिलती है?
👉 हां, पात्र किसान आवेदन कर सकते हैं?
Q3. मशीन कहाँ से लें?
👉 कृषि विभाग से सूचीबद्ध विक्रेता या CHC से।
Q4. पराली बेचने के लिए कहाँ संपर्क करें?
👉 स्थानीय CHC निजी कंपनियां या कृषि विभाग।
धान की पराली आज समस्या नहीं, बल्कि अवसर बन सकती है। सही योजना, मशीन और जानकारी से किसान:
किसानों को चाहिए कि सरकारी योजनाओं का लाभ लें और पराली जलाने की जगह आधुनिक समाधान अपनाएँ।
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