💧 कम पानी में उगने वाली फसलें: सूखे में भी मुनाफा (2025 किसान गाइड)
खेती-बाड़ी जानकारी किसानों के लिए समर्पित एक कृषि ज्ञान मंच है, जहाँ फसल उत्पादन, कीट एवं रोग प्रबंधन, सिंचाई तकनीक, बीज चयन और आधुनिक खेती के तरीकों की भरोसेमंद जानकारी सरल हिंदी भाषा में दी जाती है।
यूरिया भारतीय कृषि में सबसे महत्वपूर्ण उर्वरक है। धान, गेहूँ, गन्ना और सब्जियों जैसी फसलों की हरी वृद्धि और उपज बढ़ाने के लिए किसान सबसे ज़्यादा यूरिया पर निर्भर रहते हैं। लेकिन हर साल यूरिया की कमी की खबरें आती रहती हैं, जिससे किसानों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
राज्य को 8.30 लाख टन यूरिया आवंटित किया गया था, लेकिन अब तक केवल 5.62 लाख टन ही प्राप्त हुआ है। यानी लगभग 2.88 लाख टन की कमी है। इसके कारण किसानों को लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है।
यहाँ यूरिया ब्लैक में बेचा जा रहा है। 45 किलो के बैग का अधिकतम खुदरा मूल्य ₹266.50 है, जबकि किसान इसे ₹600-₹700 में खरीदने को मजबूर हैं।
कृषि विभाग का दावा है कि यहाँ 5.95 लाख टन यूरिया और 3.91 लाख टन डीएपी उपलब्ध है। सरकार ने कहा है कि किसानों को चिंता करने की ज़रूरत नहीं है।
यहाँ विपक्ष ने कमी का आरोप लगाया, लेकिन सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा कि राज्य में यूरिया का पर्याप्त भंडार है।
चीन ने हाल ही में यूरिया निर्यात पर प्रतिबंध में ढील दी है। इसका सीधा लाभ भारत को होगा क्योंकि अब यहाँ अतिरिक्त भंडार आएगा।
यूरिया की कमी केवल उत्पादन के कारण नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई कारण हैं:
यूरिया की कमी किसानों के लिए चिंता का विषय है, लेकिन यह हमेशा स्थायी समस्या नहीं होती। कई बार वितरण और आपूर्ति में व्यवधान के कारण यह समस्या उत्पन्न होती है। सरकार लगातार नया स्टॉक लाने और आयात बढ़ाने पर काम कर रही है। साथ ही, किसानों को वैकल्पिक खाद और जैविक खाद का भी प्रयोग करना चाहिए ताकि यूरिया पर पूरी तरह निर्भरता न रहे।
👉 आने वाले समय में, चीन से अतिरिक्त आपूर्ति और सरकारी निगरानी से स्थिति में सुधार होने की उम्मीद है।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें